विकसित भारत एवं खेल

-अजय कुमार यादव*

भारत विश्व में सबसे ज्यादा युवा जनसंख्या वाला देश है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के द्वारा जारी की गई डाटा के अनुसार भारत में इस वक्त साठ फ़ीसदी से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष की आयु से नीचे है। इस आकड़े में लगभग 30 फीसदी 15 वर्ष से 29 वर्ष के बीच के लोगों की है। यही संख्या हमें दूसरे देशों के मुकाबले खेल की दुनिया में एक मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। भारत जैसे विशाल राज्य को विकसित बनाने के लिए इस युवा जनसंख्या की अहम भूमिका है, इसी उद्देश्य के साथ भारत सरकार खेल जगत में नए नए योजनाएं और निवेशों की शुरुआत कर रही है।

खेल और अंतरिम बजट 2024 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए अंतरिम केंद्रीय बजट में खेल मंत्रालय को 3,442.32 करोड़ रुपये आवंटित किए गए , जो पिछले साल की तुलना में 45.36 करोड़ रुपये अधिक है।मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम, खेलो इंडिया के लिए ₹ 900 करोड़ आवंटित किए गए, जो पिछले बजट से ₹ 20 करोड़ अधिक है ।राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSF) को 2023-24 के संशोधित बजट 325 करोड़ रुपये की तुलना में इस बार 15 करोड़ रुपये अधिक मिलेंगे ।राष्ट्रीय खेल विज्ञान और अनुसंधान केंद्र का बजट पहले के ₹ 10 करोड़ से घटाकर ₹ 8 करोड़ कर दिया गया है, जबकि राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय को 2023-24 के बजट के ₹83.21 करोड़ से बढ़ाकर ₹ 91.90 करोड़ का आवंटन मिलेगा।राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) को भी सरकार द्वारा अंतरिम बजट में ₹ 22.30 करोड़ आवंटित करने से बढ़ोतरी मिली, जबकि 2023-24 में यह ₹ 21.73 करोड़ थी।

भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), जो राष्ट्रीय शिविरों का आयोजन करता है, एथलीटों को बुनियादी ढांचा और उपकरण प्रदान करता है, कोचों की नियुक्ति करता है, ने अपने बजटीय आवंटन में पिछले वर्ष के संशोधित व्यय 795.77 करोड़ रुपये से 26.83 करोड़ रुपये की वृद्धि देखी गई।

खेलों की संवृद्धि के लिए सरकार द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं।खेलो इंडिया, वर्ष 2017-18 में प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी द्वारा ज़मीनी स्तर के एथलीटों को एक मंच प्रदान करने तथा संपूर्ण भारत में खेल के बुनियादी ढाँचे का निर्माण करने के लिये लाया गया था।

भारत सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग (वर्ष 2021-22 से 2025 -26 तक) के दौरान “खेलो इंडिया – खेल के विकास के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम” की योजना को जारी रखने हेतु 3165.50 करोड़ रुपए के परिव्यय का निर्णय लिया है।खेलो इंडिया” योजना ने भारत में खेल क्षेत्र को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य रखा है, जिससे युवा ताकत बढ़े और खेल के क्षेत्र में नए तालाबंदी उत्पन्न हों। इससे खेलों के क्षेत्र में प्रगति हो रही है और ताकत में वृद्धि हो रही है।

ओलंपिक और पैरालंपिक में भारत के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए , युवा मामले और खेल मंत्रालय (MYAS) ने सितंबर 2014 में टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) शुरू की।

कॉमन वेल्थ गेम्स(CWG)में पदक जीतने वाले 70 एथलीटों में से 47 उनमें से TOPs योजना के तहत समर्थित थे।TOPS, भारतीय खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों में उनकी प्रदर्शन क्षमता को बढ़ावा देने का मकसद रखता है। इससे निर्मित खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को प्रतिष्ठान दिलाने में सहायक होते हैं और उन्हें उच्च स्तरीय योजनाओं का लाभ होता है।

खेलों के विकास के लिए संसाधन जुटाने के लिए स्थापित, एनएसडीएफ वित्तीय सहायता के माध्यम से एथलीटों, टीमों और राष्ट्रीय खेल महासंघों का समर्थन करता है।

एनएसडीएफ योजना ने भारत में कौशल विकास को बढ़ावा दिया है। इसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में कौशल विकास हो रहा है जिससे लोग अपने करियर को मजबूती से निर्माण कर सकते हैं और राष्ट्र के आर्थिक विकास में योगदान कर सकते हैं।

राष्ट्रीय खेल विकास कोष (NSDF) द्वारा भारत में खेलों के विकास के लिए 215 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के लिए  राष्ट्रीय तापविद्युत निगम लिमिटेड (National thermal Power corporation) और रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कारपोरेशन लिमिटेड (Rural Electrification Corporation Limited (REC)) के साथ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया।

फिटनेस को हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने के उद्देश्य से माननीय प्रधान मंत्री द्वारा 29 अगस्त, 2019 को FIT इंडिया मूवमेंट शुरू किया गया था। इस आंदोलन का मिशन व्यवहार में बदलाव लाना और अधिक शारीरिक रूप से सक्रिय जीवनशैली की ओर बढ़ना है।

इस योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत के नागरिकों से फिटनेस को अपनी दिनचर्या में एक आदत बनाने का आग्रह किया।

सरकार द्वारा एथलेटिक्स  को भी बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र में भारी निवेश  किया गया है। पिछले 5 सालों में $1431.25  मिलियन के 282 स्पोर्ट्स संसाधनों का निर्माण खेलों इंडिया प्रोग्राम के अंतर्गत हुआ।

केंद्र सरकार द्वारा भारत में खेलों को बढ़ावा देने के लिए और भविष्य में भारत अधिक से अधिक मेडल जीत सके इसके लिए 8-16 वर्ष के बच्चों के लिए NSTC (National Sports Talent contest Scheme ) की शुरुआत की गई है जिसका प्राथमिक फोकस ग्रामीण क्षेत्र में खेले जाने वाले खेल हैं। जिसके कारण अंतराष्ट्रीय स्तर पर पदकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र के साथ–साथ आदिवासी क्षेत्रों पर भी सरकार का ध्यान है। उन क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए SAG(Special Area Games Scheme) की शुरुआत की गई है जिससे उन क्षेत्रों से प्रतिभाओं का आना शुरू हो गया है।

भारत सरकार साल 2047 तक भारत को विकसित बनाने की राह बना रही है और इस राह में खेल जगत का संपूर्ण विकास एक महत्वपूर्ण कदम है,इस हेतु भारत में खेल शासन के लिये एक सुदृढ़ ढाँचे का निर्माण कर भारत की खेल संस्कृति को जमीनी स्तर पर पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।इस प्रयास में सरकार ने ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ के तहत कहा कि विद्यालय अपने पाठ्यक्रम में पारंपरिक और क्षेत्रीय खेलों को शामिल करे, लेकिन खेल को पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य घटक बनाने को अभी और स्पष्ट करने की आवश्यकता है।सरकार को उन रूढ़ियों को तोड़ने की आवश्यकता है जो महिलाओं के खेल गतिविधियों में शामिल होने की संभावना को कम करती हैं। इसका अर्थ खेल क्षेत्र में पेशेवर एथलीटों और नेतृत्वकर्ताओं के रूप में महिलाओं की उन्नति को बढ़ावा देना भी है।

इसके साथ ही, महिलाओं के खेल में निवेश के अंतर को भरने और महिलाओं एवं बालिकाओं के लिये समान आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने की भी आवश्यकता है। BCCI द्वारा हाल ही में क्रिकेट में लैंगिक वेतन समानता (Gender Pay Parity) लागू करना इस दिशा में आशाजनक कदम है।

भारत खेल जगत में नई ऊंचाइयों को हासिल करने की पूरी क्षमता रखता है और  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी इस बात को मानते है, उन्होंने पिछली साल जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 37वें राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन करते हुए कहा की भारत 2030 में यूथ ओलंपिक और 2036 में ओलंपिक के आयोजन के लिए तैयार है। ओलंपिक के आयोजन के लिए हमारी आंकाक्षा भावनाओं तक सीमित नहीं है, इसके पीछे ठोस कारण है। 2036 तक भारत दुनिया की अग्रणी आर्थिक ताकतों में से एक होगा। उस समय तक हर भारतीय की आय कई गुना अधिक होगी। तब तक देश में एक बड़ा मध्यवर्ग होगा। स्पोर्ट्स से लेकर स्पेस तक भारत का तिरंगा और शान से लहरा रहा होगा।

अंततः भारत में खेल के बुनियादी ढांचे का विकास हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण रहा है, और जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गई हैं। हालाँकि, अभी भी ऐसी चुनौतियाँ हैं जिन्हें खेल को सभी के लिए सुलभ बनाने और युवा खेल प्रतिभाओं के विकास को बढ़ावा देने के लिए दूर करने की आवश्यकता है। सरकार और निजी क्षेत्र को खेल के बुनियादी ढांचे में निवेश जारी रखने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि मौजूदा सुविधाएं अच्छी तरह से बनाए रखी जाएं। इससे देश में एक खेल संस्कृति का निर्माण होगा जो युवा प्रतिभाओं के विकास को बढ़ावा देगी और विश्व स्तर पर देश की खेल छवि को बढ़ावा देगी।

*सहायक प्राध्यापक, सत्यवती महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय


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